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Showing posts from August, 2019
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लक्षद्वीप : वैभवशाली एवं रोमांचक पर्यटन    लक्षद्वीप के प्राकृतिक वैभव को धरती का मुकुट कहा जाना चाहिए। लक्षद्वीप की भव्यता, दिव्यता एवं वैभव अतुलनीय है।    भारत का केन्द्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप एक बेहद दर्शनीय एवं रोमांचक पर्यटन है। शायद इसी लिए लक्षद्वीप वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। फिरोजी नीला जल, चौतरफा समुद्री तट की एक लम्बी श्रंृखला एवं जलक्रीड़ा पर्यटकों को बेहद रोमांचक एहसास कराती है।     अरब सागर के मध्य रचेे बसे लक्षद्वीप अपने खास आकर्षण के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। भारत का यह द्वीप समूह दक्षिण भारत के केरल से करीब 200 से 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। लक्षद्वीप भारत का सबसे छोटा केेन्द्र शासित प्रदेश है। करीब 32 वर्ग किलोमीटर दायरे में फैला लक्षद्वीप जल खेल का आकर्षक केन्द्र है।    प्रकृति प्रेमियों के लिए लक्षद्वीप किसी स्वर्ग से कम नहीं है। लक्षद्वीप समूह मूंगा के लिए विश्व में प्रसिद्ध है। इसे मूंगा की धरती भी कहा जाता है। पर्यटक लक्षद्वीप पर सूर्योदय एवं सूर्यास्त का इन्द्रधनुषी दर्शन कर...
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अण्डमान एवं निकोबार : धरती का स्वर्ग    अण्डमान एवं निकोबार को अद्भुत पर्यटन कहा जाना चाहिए। जी हां, अण्डमान एवं निकोबार का प्राकृतिक सौन्दर्य विलक्षण है।     शायद यही कारण है कि अण्डमान एवं निकोबार वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। खास यह कि अण्डमान एवं निकोबार द्वीप समूह एक शानदार हिल स्टेशन के साथ ही पौराणिक एवं ऐतिहासिक भी है। भारत के केन्द्र शासित इस प्रदेश में चौतरफा प्रकृति के खूबसूरत नजारे दिखते हैं।    भारत का यह केन्द्र शासित प्रदेश काफी कुछ अलग दर्शनीय है। बंगाल की खाड़ी के दक्षिण में हिंद महासागर में स्थित अण्डमान एवं निकोबार वस्तुत: एक शानदार द्वीप समूह है। इसमें छोटे-छोटे 572 द्वीप है। इन सभी द्वीप समूह को मिला कर अण्डमान एवं निकोबार के नाम से जाना पहचाना जाता है।     खास यह कि इन 572 में कुछ ही द्वीप पर आबादी है। अण्डमान एवं निकोबार की राजधानी पोर्ट ब्लेयर है। अण्डमान एवं निकोबार पर चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की एक निराली छटा आलोकित है। प्राकृतिक सौन्दर्य की यह इन्द्रधनुषी छटा वैश्विक पर्...
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शंकराचार्य मंदिर : इन्द्रधनुषी स्थापत्य कला     शंकराचार्य मंदिर को वास्तुकला का इन्द्रधनुषी आयाम कहा जाना चाहिए। खास तौर से यह मंदिर कश्मीरी वास्तुकला को बेहतरीन तौर तरीके से प्रस्तुत करता है।     भारत के जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर स्थित शंकराचार्य मंदिर का वास्तुशिल्प अद्भुत एवं विलक्षण है। कश्मीर के दक्षिण-पूर्वी इलाके में स्थित शंकराचार्य मंदिर एक शानदार धार्मिक पर्यटन स्थल भी है।    समुद्र तल से करीब 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित शंकराचार्य मंदिर एक सुरम्य एवं शांत धार्र्मिक स्थल है। भगवान शिव को समर्पित यह भव्य-दिव्य मंदिर शंकराचार्य पर्वत पर स्थित है। गोपदरी हिल स्टेशन इलाके में स्थित शंकराचार्य मंदिर के गर्भगृह में विशाल शिवलिंग प्राण प्रतिष्ठित है।     खास यह कि यह विशाल मंदिर एक विशाल चट्टान पर स्थित है। खास यह भी है कि इस मंदिर में 13 परतों वाला एक अष्टकोणीय तहखाना भी है। तहखाना से लेकर मंदिर के आन्तरिक एवं बाह्य परिदृश्य में कश्मीरी स्थापत्य कला का शानदार दर्शन होता है।   पत...
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प्फुत्सेरो हिल स्टेशन : शीतलता का रोमांच    प्फुत्सेरो हिल स्टेशन को ग्रीन लैण्ड कहा जाना चाहिए। जी हां, प्फुत्सेरो हिल स्टेशन पर चौतरफा शांत, शीतल एवं शुद्ध पर्यावरण दिखता है।     सर्दियों में प्फुत्सेरो हिल स्टेशन पर्यटकों को बेहद रोमांचक एहसास कराता है। खास तौर से जब सर्दियों में तापमान शून्य से भी नीचे चला जाता है। भारत के नागालैण्ड के फेक जिला का यह शानदार हिल स्टेशन सदैव शांत एवं शीतलता का एहसास कराता है। इसे आैषधीय वनस्पतियों का खजाना भी कहा जाता है।      प्फुत्सेरो हिल स्टेशन को आैषधीय वनस्पतियों की प्रचुरता प्राकृतिक समृद्धता सम्पन्न बनाती है। आैषधीय वनस्पतियों की सुगंध प्फुत्सेरो हिल स्टेशन के परिवेश को मोहक बना देती है। नागालैण्ड का यह हिल स्टेशन वस्तुत: एक छोटा शहर है।     अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित होने के कारण प्फुत्सेरो हिल स्टेशन एक शांत शीतलता प्रदान करता है। हरा भरा यह शहर नागालैण्ड का सबसे शीतल शहर माना जाता है। यहां की शांत एवं शीतल जलवायु पर्यटकों को बेहद रोमांचक एहसास कराती...
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मावल्यान्नॉग : गांव में हिल स्टेशन का आनन्द        गांव में भी हिल स्टेशन का भरपूर आनन्द लें। जी हां, मेघालय के खासी हिल्स का गांव मावल्यान्नॉग किसी शानदार हिल स्टेशन से कम नहीं है।     मावल्यान्नॉग को एक आदर्श गांव के तौर पर देश दुनिया में जाना पहचाना जाता है। एशिया के सबसे स्वच्छ गांव का खिताब मावल्यान्नॉग के खाते में जाता है। भारत के मेघालय के खासी हिल्स के इस गांव का प्राकृतिक सौन्दर्य पर्यटकों को मुग्ध कर लेता है।    खास यह है कि मेघालय के इस आदर्श गांव मावल्यान्नॉग में मातृवंश समाज की संरचना है। शिलांग से भारत-बांग्लादेश सीमा की ओर करीब 90 किलोमीटर दूर स्थित मावल्यान्नॉग प्रकृति की आगोेश में रचा बसा एक सुन्दर एवं शानदार पिकनिक स्पॉट भी है।    खास यह है कि चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य की निराली इन्द्रधनुषी आभा पर्यटकों को आकर्षित करती है। वस्तुत: मावल्यान्नॉग खासी समुदाय का इलाका है। खासी समुदाय की परम्परा की मानें तो परिवार की बड़ी बेटी ही पारिवारिक सम्पत्ति एवं धन दौलत की वास्तविक उत्...