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खाओ लाक : अतुलनीय सौन्दर्य    खाओ लाक समुद्र तट की विशालता को अतुलनीय कहा जाना चाहिए। जी हां, खाओ लाक समुद्र तट की विशालता अद्भुत एवं अद्वितीय है।     शायद इसे दुनिया के बेहतरीन समुद्र तटों में से एक कहा जाएगा। थाईलैंड के प्रांत फांग नगा के ताकुआ-पा जिला का यह सुन्दर समुद्र तट वैश्विक ख्याति रखता है। इसकी अतुलनीय सुन्दरता कहती है कि खाओ लाक नहीं देखा तो दुनिया में कुछ नहीं देखा।     खाओ लाक समुद्र तट वस्तुत: प्रकृति का एक शानदार उपहार है। जिसे देख कर दिल एवं दिमाग प्रफुल्लित हो उठता है। चौतरफा पहाड़ों की सुन्दरता आैर नारियल के पेड़ों की शानदार श्रंखला परिवेश को अत्यधिक सुन्दर बना देते हैं।     खाओ लाक वस्तुत: थाईलैण्ड का एक अद्भुत द्वीप है। झीलों-झरनों, पहाडों एवंं पथरीली संरचनाओं से सजा खाओ लाक बेहद दर्शनीय है। वस्तुत: देखें तो मीलों लम्बे सागर तट थाईलैंड की शान एवं शोभा हैं।     खाओ लाक समुद्र तट पर आलीशान रिसार्ट आदि इत्यादि की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। लिहाजा पर्यटक समुद्...
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मलक्का: जल पर्यटन की रोमांचक दुनिया    मलक्का को नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा। जी हां, मलक्का का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। जल पर्यटन का यह सुन्दर शहर काफी कुछ विशिष्ट है।    मलेशिया का शहर मलक्का वस्तुत: एक शानदार पर्यटन क्षेत्र है। जलक्रीड़ा का आनन्द लेना हो या हेरिटेज टूरिज्म की दुनिया में डूबना हो या फिर प्रकृति की गोद का ह्मदयस्पर्शी एहसास करना हो तो मलक्का से बेहतरीन कुछ भी नहीं हो सकता।    शायद इसीलिए मलक्का को मलेशिया का सबसे शानदार एवं बेहतरीन पर्यटन माना जाता है। मलक्का दुनिया के श्रेष्ठतम बंदरगाह के लिए भी जाना एवं पहचाना जाता है। मलक्का 15वीं शताब्दी के आसपास एशिया के सबसे बड़े व्यापारिक बंदरगाह के रूप में जाना एवं पहचाना जाता है।    शायद इन विशिष्टताओं को देखते हुए यूनेस्को ने मलक्का को विश्व धरोहर घोषित किया है। समुद्र तट एवं बैकवाटर्स की गोद में रचा-बसा मलक्का वस्तुत: स्थापत्य कला का एक शानदार शहर है। प्राचीन इमारतें एवं उनकी स्थापत्य कला मलक्का की शान एवं शोभा हैं।    ...
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स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी: दुनिया का बेशकीमती स्मारक    स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को दुनिया का बेशकीमती स्मारक कहा जाना चाहिए। विश्व की श्रेष्ठतम कृति स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी को दुनिया का बेहतरीन पर्यटन कहा जा सकता है।     अमेरिका के शहर न्यूयार्क के हार्बर में स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी वस्तुत: फ्रांस एवं अमेरिका की दोस्ती की प्रतीक है। वस्तुत: देखें तो यह विशाल प्रतिमा विश्व को जागरुक करने वाली है। स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की विशिष्टता को देखते हुए यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है।    वर्ष 1886 में अमेरिका क्रांति के दौर से गुजर रहा था तो फ्रांस ने दोस्ती के उपहार स्वरूप अमेरिका यह विशाल मूर्ति भेंट की थी। तांबा धातु से बनी यह विशाल प्रतिमा दुनिया के आकर्षण का केन्द्र है। साथ ही यह स्थल अब एक आदर्श पर्यटन के तौर पर विशेष ख्याति रखता है।     करीब 151 फुट ऊंची विशाल प्रतिमा अमेरिका की शान एवं शोभा है। लिबर्टी द्वीप पर स्थित स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी की चौकी एवं आधारशिला को लेकर इसकी ऊंचाई करीब 305 फुट ऊंची है। इस विशाल म...
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उबुद: एक खूबसूरत दुनिया    उबुद का प्राकृतिक सौन्दर्य किसी स्वर्ग से कम नहीं। जी हां, उबुद पर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो।    इंडोनेशिया के बाली द्वीप का एक छोटा सा गांव उबुद वस्तुत: एक शानदार वैश्विक पर्यटन है। खास यह कि उबुद की सुन्दरता पर्यटकों को मुग्ध कर लेती है। शायद इसीलिए उबुद सबसे अधिक पसंदीदा हनीमून प्वांइट के तौर पर देखा जाता है।     खास यह है कि उबुद इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति का अद्भुत केन्द्र बन चुका है। लिहाजा इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति से साक्षात्कार करना हो तो पर्यटकों को उबुद की यात्रा अवश्य करनी चाहिए।     बाली द्वीप का यह सुन्दर गांव वैश्विक पर्यटकों का बेहद पसंदीदा है। उबुद को बाली की सांस्कृतिक जड़ भी कहा जाता है। दुनिया भर के पर्यटक इंडोनेशिया की कला एवं संस्कृति से रूबरू होने के लिए उबुद की यात्रा करते हैं। शायद इसीलिए उबुद को 'आईलैंड आफ गॉड्स" कहा जाता है।    उबुद के सम्पूर्ण परिदृश्य को देखें तो भगवान के द्वीप के नाम से भी उबुद को ख...
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अंकोरवाट मंदिर: विलक्षण स्थापत्य कला    अंकोरवाट मंदिर को प्राचीन स्थापत्य कला का एक अद्भुत एवं विलक्षण अलंकरण कहा जाना चाहिए। जी हां, कंबोडिया का यह शानदार एवं अद्भुत मंदिर वस्तुत: दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक स्मारक है।     लिहाजा इसे अद्भुत एवं विलक्षण कहना कोई अतिश्योक्ति न होगी। कंबोडिया के अंकोर का अंकोरवाट मंदिर वस्तुत: भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित है। करीब 162.6 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला अंकोरवाट मंदिर अति प्राचीन धरोहर एवं धार्मिक पर्यटन है।     मान्यता है कि कंबोडिया के खमेर साम्राज्य ने इसका निर्माण एक विशाल हिन्दू मंदिर के रूप में कराया था। हालांकि बाद में 12वीं शताब्दी के आसपास अंकोरवाट मंदिर ने बौद्ध मंदिर का स्वरूप अख्तियार कर लिया। अंकोर स्थित इस दिव्य-भव्य मंदिर को वैश्विक ख्याति हासिल है।   विशेषज्ञों की मानें तो अंकोर को प्राचीनकाल में यशोेधरपुर के नाम से जाना एवं पहचाना जाता था। मीकांग नदी के किनारे स्थित अंकोरवाट मंदिर सिमरिप शहर में स्थित है। मान्यता है कि अंकोरवाट मंदिर संसार का सब...