कांगड़ा किला: खूबसूरत स्थापत्य कला
कांगड़ा किला की स्थापत्य कला को अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। जी
हां, इस दिव्य-भव्य का स्थापत्य दर्शन पर्यटकों को सम्मोहित कर देता है।
राजसी वैभव के साथ ही इस दिव्य-भव्य किला का पौराणिक एवं ऐतिहासिक महत्व
भी है। भारत के हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा का यह शानदार किला अपने विहंगम
दृश्य के लिए जाना पहचाना जाता है। कांगड़ा के निकट एक शिखर पर्वत पर
विद्यमान कांगड़ा किला प्राचीनकाल की धरोहर के तौर पर है।
धर्मशाला से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित कांगड़ा किला की दिव्यता-भव्यता भी
अति दर्शनीय है। यह किला व्यास नदी एवं उसकी तलहटी पर रचा बसा है। बाण
गंगा नदी एवं मांझी नदी के संगम पर रचा-बसा कांगड़ा किला से पर्यटक आसपास का
विहंगम दृश्य भी देख सकते हैं।
कांगड़ा किला वस्तुत: एक खड़ी चट्टान पर स्थित है। कांगड़ा किला के प्रवेश
द्वार के निकट एक छोटा किन्तु शानदार संग्रहालय है। इस संग्रहालय में
कांगड़ा किला का इतिहास दर्शित है।
कांगड़ा किला एवं आसपास का क्षेत्र धार्मिक एवं आध्यात्मिक माना जाता है।
पुराने कांगड़ा के निकट एक शानदार पर्वत चोटी पर प्रसिद्ध जयंती माता मंदिर
स्थित है। इस विशाल मंदिर का निर्माण गोरखा सेना के जनरल अमर सिंह थापा ने
किया था।
इस किला से कुछ ही कदम दूर महाराजा संसार चन्द्र कटोच संग्रहालय स्थित है।
इस संग्रहालय का संचालन कांगड़ा के शाही परिवार के हाथों में है।
विशेषज्ञों की मानें तो कांगड़ा किला अपनी दिव्यता-भव्यता के साथ ही आक्रमण,
युद्ध, कौशल-पराक्रम, धन-सम्पत्ति एवं विकास-वैभव का गवाह है।
यह शक्तिशाली किला त्रिजटा साम्राज्य की उत्पत्ति को भी दर्शित करता है।
विशेषज्ञों की मानें तो कांगड़ा किला हिमालय का सबसे बड़ा किला एवं अति
प्राचीन किला है। इस किला की प्राचीनता का उल्लेख महाकाव्य महाभारत में भी
मिलता है।
कहावत है कि कांगड़ा का यह किला आर्थिक तौर पर अति समृद्ध रहा है। इस किला
में अकल्पनीय धन रखा था। इस अकूत खजाना के कारण इस किला पर कई बार चढ़ाई भी
हुई।
मान्यता है कि यह अकूत सम्पदा किला में स्थित माता बृजेश्वरी देवी को बतौर
भेंट चढ़ाया जाता था। कांगड़ा का यह किला करीब 463 एकड़ में फैला हुआ है।
शिवालिक पहाड़ियों का यह किला अपने राजसी वैभव के कारण विशेष ख्याति रखता
है।
ऊंची-ऊंची दीवारों से घिरा यह किला काफी कुछ विशिष्टता रखता है। इस किला
से बाण गंगा नदी एवं माझी नदी के सुन्दर संगम को भी दर्शित करता है।
इस विशाल किला का निर्माण कटोच राजवंश के महाराजा सुशर्मा चन्द्र ने कराया था। यहां कटोच वंश का शासन था।
चौतरफा प्राकृतिक सौन्दर्य से घिरा यह शानदार किला अति दर्शनीय है। कांगड़ा
किला के मखमली घास के शानदार मैदान पर्यटकों को रोमांचित कर देते हैं।
कांगड़ा किला की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम
एयरपोर्ट गग्गल एयरपोर्ट है। गग्गल एयरपोर्ट से कांगड़ा किला की दूरी करीब
35 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन पठानकोट जंक्शन है। पर्यटक सड़क मार्ग
से भी कांगड़ा किला की यात्रा कर सकते हैं।
32.101500,76.273200
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