पराशर झील : अद्भुत एवं विलक्षण
पराशर झील का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण कहा जाना चाहिए। पराशर झील वस्तुत: एक शानदार धार्मिक पर्यटन है।
विशेषज्ञों की मानें तो पराशर झील के आसपास का इलाका ऋषि पराशर की तप
स्थली है। लिहाजा पराशर झील का इलाका धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व रखता
है। पर्यटक पराशर झील पर हिल स्टेशन का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।
भारत के हिमाचल प्रदेश के जिला मण्डी स्थित पराशर झील का प्राकृतिक
सौन्दर्य अति दर्शनीय है। समुद्र तल से करीब 2730 मीटर ऊंचाई पर स्थित
पराशर झील का विशेष आकर्षण है। झील में तैरता भूखण्ड यहां का मुख्य आकर्षण
है। झील में तैरते इस शानदार एवं सुन्दर भूखण्ड को स्थानीयता में टाहला
कहते हैं।
झील का यह सुन्दर भूखण्ड कभी भी एक स्थान पर नहीं रहता। यह भूखण्ड झील में
स्थान परिवर्तन करता रहता है। पराशर झील का यह एक आश्चर्य एवं कौतुहल है।
इस शानदार झील की मछलियांं भी एक खास आकर्षण होती हैं। इस शानदार झील के
किनारे पगोड़ा शैली पर आधारित एक दिव्य-भव्य मंदिर है।
इस शानदार मंदिर का निर्माण 14 वीं शताब्दी में मण्डी रियासत के राजा
बाणसेन ने कराया था। स्थापत्य कला, कला-संस्कृति एवं प्राकृतिक सौन्दर्य
प्रेमियों के लिए पराशर झील एवं आसपास का इलाका किसी स्वर्ग से कम नहीं
है।
विशेषज्ञों की मानें तो मंदिर स्थल वस्तुत: ऋषि पराशर की तप स्थली है। इस
स्थान पर ऋषि पराशर ने तपस्या की थी। पराशर झील का यह शानदार मंदिर लकड़ी से
बना है। तीन मंजिला इस मंदिर की दिव्यता-भव्यता अति दर्शनीय है।
हालांकि मंदिर की निर्माण शैली परम्परागत है। फिर भी दीवारों की संरचना
में पत्थरों के साथ ही लकड़ी का भी उपयोग बेहतरीन तौर तरीके से किया गया
है।
मंदिर की कलात्मकता अनूठी एवं अमूल्य है। मंदिर के बाहरी स्तंभ नक्काशी के
अद्भुत एवं विलक्षण आयाम हैं। देवी देवताओं की छवियां, पेड़-पौधों का अंकन,
सांप, फूल-बेल पत्तियां, पशु-पक्षियों का चित्रांकन पर्यटकों एवं
श्रृद्धालुओं को आकर्षित करता है।
मण्डी से उत्तर दिशा में करीब 50 किलोमीटर दूर स्थित पराशर झील श्रद्धा
एवं आस्था का केन्द्र है। विशेषज्ञों की मानें तो पराशर झील किसी आश्चर्य
से कम नहीं है। इस झील में अनोखी पत्तियां निकलती है। स्थानीयता में इसे
बर्रे एवं छोटी पत्तियों को जर्रे कहते हैं। इनको देव आशीर्वाद माना जाता
है। श्रृद्धालु इनको श्रद्धापूर्वक अपने पास रख लेते हैं।
महर्षि पराशर को समर्पित इस मंदिर ऋषि पराशर की पिण्डी, भगवान शिव एवं
विष्णु, महिषासुर मर्दिनी आदि देवी-देवताओं की पाषाण प्रतिमाएं प्राण
प्रतिष्ठित हैं। खास यह कि मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्तों को पराशर
झील से निकली पत्तियां दी जाती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो पराशर ऋषि
वशिष्ठ मुनि के पौत्र एवं मुनि शक्ति के पुत्र थे।
पराशर ऋषि की प्रतिमा में गजब का आकर्षण है। इस प्राचीन प्रतिमा का स्पर्श
करा कर श्रृद्धालुओं को चावल के दाने प्रसाद स्वरूप दिये जाते हैं।
श्रद्धालु विश्वास के साथ इन चावल के दानोें को ग्रहण करते हैं। मान्यता है
कि पराशर झील इलाके में बारिश के लिए भगवान श्री गणेश को आमंत्रित किया
जाता है।
निकट के गांव भटवाड़ी में श्री गणेश मंदिर है। भगवान श्री गणेश जी की
आमंत्रण पर विशेष यात्रा निकलती है। खास यह कि ऋषि पराशर के जन्मोत्सव पर
पराशर झील पर एक विशाल मेला का आयोजन होता है। झील का प्राकृतिक सौन्दर्य
देख कर पर्यटक अभिभूत हो उठते हैं।
पराशर झील के प्राकृतिक सौन्दर्य को वॉलीवुड के कैमरों में भी कैद किया जा
चुका है। विशेषज्ञों की मानें पराशर झील पर असंख्य फिल्मों की शूटिंग हो
चुकी है।
मण्डी से पराशर झील मार्ग पर प्राकृतिक सौन्दर्य की चौतरफा निराली छटा
दिखती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे धरती पर स्वर्ग उतर आया हो। निकट ही
ब्रिदांवन में एक शानदार संग्रहालय है। इसका मुख्य आकर्षण फोेटो गैलरी है।
यह संंग्रहालय हिमाचल दर्शन कराता है।
पराशर झील की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट
भुंटर एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से पराशर झील की दूरी करीब 90 किलोमीटर है।
निकटतम रेलवे स्टेशन कीरतपुर जंक्शन एवं चण्डीगढ़ जंक्शन हैं। पर्यटक सड़क
मार्ग से भी पराशर झील की यात्रा कर सकते हैं।
31.754477,77.101641
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