चौसठ योगिनी मंदिर: अतुलनीय स्थापत्य कला
चौसठ योगिनी मंदिर को स्थापत्य कला का अतुलनीय आयाम कहा जाना चाहिए। जी
हां, चौसठ योगिनी मंदिर की स्थापत्य कला अद्भुत एवं विलक्षण है।
मंदिर की संरचना बेहद दर्शनीय है। शायद यही कारण है कि यह शानदार मंदिर
श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को लुभाता है। भारत के मध्य प्रदेश के शहर जबलपुर
स्थित चौसठ योगिनी मंदिर की नक्काशी अति लुभावनी है।
खास यह है कि चौसठ योगिनी मंदिर मध्य प्रदेश का प्रसिद्ध पर्यटन क्षेत्र
है। यह दिव्य-भव्य मंदिर जबलपुर की ऐतिहासिक सम्पन्नता एक शानदार अध्याय
है।
संगमरमर की प्रसिद्ध चट्टानों के मध्य स्थित चौसठ योगिनी मंदिर मुख्य रूप
से देवी दुर्गा को समर्पित है। खास यह कि इस मंदिर में देवी दुर्गा की 64
अनुषांगिक प्रतिमाएं प्राण प्रतिष्ठापित हैं।
इस मंदिर की विशिष्टता है कि मंदिर के गर्भगृह में मध्य में भगवान शिव की
प्रतिमा प्रतिष्ठापित है। भगवान शिव की प्रतिमा के चारो दिशाओं में देवियों
की प्रतिमाएं विद्यमान हैं।
भगवान शिव एवं मां पार्वती वैवाहिक वेशभूषा में विराजमान हैं। निकट ही
नंदी की दिव्य भव्य प्रतिमा स्थापित है। इस दिव्य भव्य मंदिर का निर्माण
कलचुरी राजवंश के शासकों ने वर्ष 1000 के आसपास कराया था।
दशवीं शताब्दी के इस मंदिर की विशेष ख्याति है। तत्पश्चात त्रिपुरी
राजवंश के महाराजा कर्णदेव की महारानी अरुणा देवी ने इसको दिव्य-भव्य
स्वरूप प्रदान किया था। मंदिर का निर्माण देवी दुर्गा को समर्पित चौसठ
योगिनी मंदिर मध्य प्रदेश सहित देश दुनिया में विशेष ख्याति रखता है।
जबलपुर का यह दिव्य भव्य मंदिर सुप्रसिद्ध पर्यटन स्थल भेड़ाघाट-धुआंधार के
निकट एक शीर्ष पर्वत चोटी पर विद्यमान है। मंदिर एवं मंदिर मार्ग से
चौतरफा अति दर्शनीय दृश्य पर्यटकों एवं श्रद्धालुओं को प्रकृति के दर्शन
कराता है। यहां से बलखाती नर्मदा नदी के अति सुन्दर दर्शन होते हैं।
मान्यता है कि यह स्थान ऋषि भृगु की जन्म स्थली है। ऋषि भृगु के प्रताप
से प्रभावित होकर कलचुरी साम्राज्य के शासकों ने इस दिव्य-भव्य संरचना को
अस्तित्व दिया था। मंदिर की स्थापत्य कला अति सुन्दर एवं दर्शनीय है।
मंदिर के चौतरफा चहारदीवारी है। यह चहारदीवारी पत्थर से संरचित है।
ब्राह्माण्ड की जननी दुर्गा को समर्पित यह मंदिर कलात्मकता का एक सुन्दर
प्रतिमान है। पत्थरों की देवी मूर्तियां सौन्दर्य शास्त्र की गाथा को खुद ब
खुद बयां करती हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो इस प्राचीन मंदिर का गुप्त मार्ग गोंड़ रानी
दुर्गावती के महल से जाकर मिलता है। मान्यता है कि मंदिर में आज भी 64
योगिनियां पहरा देती हैं। विशेषज्ञों की मानें तो प्राचीन काल में इस मंदिर
को गोलकी मठ के नाम से ख्याति हासिल थी।
जबलपुर शहर से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित चौसठ योगिनी मंदिर एक आदर्श
पर्यटन क्षेत्र माना जाता है। पर्यटक चौसठ योगिनी मंदिर एवं उसके आसपास भी
प्राकृतिक सौन्दर्य एवं आश्चर्यजनक संरचनाओं के दर्शन कर सकते हैं। जबलपुर
से कुछ ही दूर पर बैलेंसिंग रॉक है। पर्यटक बैलेेंसिंग रॉक की भी यात्रा कर
सकते हैं।
जबलपुर से करीब 2 किलोमीटर दूर स्थित बैलेंसिंग रॉक अति दर्शनीय प्राचीन
क्षेत्र है। दीर्घगोलाकार शिलाखण्ड अति आश्चर्यजनक ढ़ंग से एक विशाल
शिलाखण्ड पर स्थित है। इसे गुरुत्वाकर्षण का अद्भुत केेन्द्र माना जाता
है।
यह संरचना प्राकृतिक है। आश्चर्यजनक किन्तु सत्य दिखने वाला बैलेंसिंग रॉक
बेहद दर्शनीय है। शिला की खासियत इसकी विशालता, भार, कठोरता एवं सटीक
गुरुत्वाकर्षण है। प्रकृति प्रेेमियों के लिए यह एक सुन्दर स्थान है।
चौसठ योगिनी मंदिर की यात्रा के लिए सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम
एयरपोर्ट डुमना एयरपोर्ट जबलपुर है। डुमना एयरपोर्ट से चौसठ योगिनी मंदिर
की दूरी करीब 34.1 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन जबलपुर रेलवे जंक्शन
है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी चौसठ योगिनी मंदिर की यात्रा कर सकते हैं।
23.132799,79.801697
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