मुनरो द्वीप: इन्द्रधनुषी पर्यटन

    मुनरो द्वीप को इन्द्रधनुषी पर्यटन कहा जाना चाहिए। जी हां, मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य अद्भुत एवं विलक्षण है। वस्तुत: मुनरो द्वीप आठ छोटे द्वीपों का एक समूह अर्थात बड़ा द्वीप है। 

    भारत के केरल प्रांत के कोल्लम जिला का यह द्वीप अति दर्शनीय है। स्थानीयता में इसे मुनरो थुरूप भी कहा जाता है। छोटे-छोटे आठ द्वीपों का यह समूह जल पर्यटन के लिए खास तौर से जाना एवं पहचाना जाता है।

   खास यह है कि कोल्लम से करीब 27 किलोमीटर दूर स्थित मुनरो द्वीप की यात्रा जल परिवहन एवं सड़क परिवहन दोनो से ही की जा सकती है। वस्तुत: मुनरो द्वीप अष्टमुड़ी झील एवं कल्लड़ा नदी का संगम स्थल है। विशेषज्ञों की मानें तो इस अति दर्शनीय द्वीप की खोज एक ब्रिटिश अफसर ने की थी। 

   ब्रिटिश अफसर का नाम कर्नल जॉन मुनरो था। लिहाजा इस शानदार द्वीप को कर्नल मुनरो के नाम से जाना एवं पहचाना गया। कर्नल मुनरो ने इस क्षेेत्र में नहरों एवं अन्य संरचनाओंं का आकार प्रकार दिया था। 

   खास यह रहा कि ब्रिटिश अफसर मुनरो ने इलाके में बैकवाटर्स के मार्गों के एकीकरण में विशेष भूमिका का निर्वाह किया था। लिहाजा मुनरो द्वीप ने एक शानदार जल पर्यटन का स्वरूप अख्तियार किया। मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य देश विदेश के पर्यटकों को रोमांचित करता है। लिहाजा पर्यटन यहां के सौन्दर्य से खिचें चले आते हैं। 

   सैलानी मुनरो द्वीप का प्राकृतिक सौन्दर्य निहारने एक बार अवश्य आते हैं। मुनरो द्वीप की यात्रा के बाद पर्यटक यहां के रोमांच को जीवन पर्यंत भूल नहीं पाते हैं। खास यह कि इस सुन्दर द्वीप का धार्मिक महत्व भी है।

  इस द्वीप पर मुलाछत्रा एवं कल्लुविला अति दर्शनीय मंदिर हैं। एक प्राचीन चर्च भी इस द्वीप की शान एवं शोभा है। इस चर्च की संरचना 1878 में की गयी थी। 
   मुनरो द्वीप का एक विशेष स्थान पल्लीयाम थुरूथ अपनी सुन्दरता एवं शांति के लिए जाना एवं पहचाना जाता है। इसेे छुट्टियां मनाने के लिए एक आदर्श स्थान माना जाता है। नहरों एवं झीलों का यह संगम बेेहद सुन्दर है। 

    ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे पर्यटक स्वप्नलोक में विचरण कर रहे हों। मुनरो द्वीप पर दर्शनीय स्थलों की एक लम्बी श्रंखला विद्यमान है। चौतरफा नारियल के सुन्दर पेड़ों की श्रंखला मुनरो द्वीप की सुन्दरता में चार चांद लगा देती है। 

   खास यह कि नारियल के रेशों केे उद्योग के लिए मुनरो द्वीप खास तौर से प्रसिद्ध है। बैकवाटर्स की दृष्टि से देखें तो मुनरो द्वीप एक छिपा हुआ मोती है। खास तौर से ओणम पर नाव की दौड़ देखने वाली होती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जल पर्यटन का शानदार श्रंगार किया गया हो। 

   ओणम पर मुनरो द्वीप किसी दुल्हन की भांति दिखता है। मुनरो द्वीप पर्यटन की अनूठी परिभाषा को रेखांकित करता है। द्वीप की शांत शीतलता पर्यटकों को प्रफुल्लित कर देेती है। 

    पर्यटक इस द्वीप पर नौकायन का भी भरपूर आनन्द ले सकते हैं। चाहे क्रूज की सवारी करनी हो या फिर नौका में द्वीप का भ्रमण करना हो या फिर जलक्रीड़ा का आनन्द लेना हो।

  मुनरो द्वीप आनन्द की हर सुखद अनुभूति प्रदान करता है। मुनरो द्वीप पर ठहरने के लिए आलीशान रिसार्ट एवं अतिथिगृह है। लिहाजा पर्यटक मुनरो द्वीप के रोमांच का भरपूर आनन्द ले सकते हैं।

   मुनरो द्वीप की यात्रा के सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हैं। निकटतम एयरपोर्ट तिरुवनंतपुरम इण्टरनेशनल एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 84 किलोमीटर है। निकटतम रेलवे स्टेशन कोल्लम रेलवे जंक्शन है। कोल्लम रेलवे स्टेशन से मुनरो द्वीप की दूरी करीब 27 किलोमीटर है। पर्यटक सड़क मार्ग से भी मुनरो द्वीप की यात्रा कर सकते हैं।
8.973700,76.609220

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